Beti hoon , bojh nahi.
क्यों हर ख्वाब से पहले "लड़की" होना याद दिलाया जाता है? क्यों हर हक़ को लेने से पहले "घर की इज़्ज़त" समझाया जाता है? भाई जीए तो आज़ादी, मैं जीऊँ तो बगावत? क्यों हर सोच पर मेरे सवालों की सज़ा मिलती है राहत? ना उड़ने दिया, ना गिरने दिया, बस चार दीवारों में सिमटने दिया... अब सवाल नहीं — जवाब बनूंगी, जो छीन लिया गया था — वो हक़ बन के उभरूंगी
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
