beti
हम खुश भी हैं, और परेशान भी… बेटी ने नाम रोशन किया, अपने पैरों पर खड़ी हुई। पर दुनिया हर सवाल हमसे ही पूछती है— “शादी कब करोगे इसकी?” डर उसे खोने का नहीं, डर समाज का है… वरना हमारी बेटी हमें पहले ही गर्व दे चुकी है।
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