beti
वो घर की शान भी है, और घर की टेंशन भी… डिग्रियाँ उसकी मेहनत की गवाह हैं, सपने उसके अपने नाम से जाने जाते हैं। फिर भी हर दुआ के बाद एक सवाल— “शादी कब करोगी?” माँ-बाप डरते हैं दुनिया से, दुनिया डरती है उसकी उड़ान से। वो कामयाब है अपने दम पर, पर घर में उसकी जीत अधूरी मानी जाती है। उसे घर बसाने की फिक्र है सबको, किसी को ये फिक्र नहीं कि उसने खुद को कैसे बनाया है। वो बेटी है… इसलिए नहीं, कि बोझ है— बल्कि इसलिए कि हर उम्मीद उसी से बाँध दी गई है।
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