Benaam ishq
मैंने हर लफ्ज़ में तेरा नाम लिखा, तेरी हँसी को अपना अरमान लिखा। हर दुआ में तुझे माँग लिया, पर तूने कभी जवाब नहीं दिया। तेरी आँखों में एक झलक चाही थी, तेरे लफ्ज़ों में थोड़ा सा अपनापन माँगा था। पर तू हर बार खामोश रहा, जैसे मैं कभी तेरी दुनिया का हिस्सा ही नहीं थी। मैंने बिना किसी उम्मीद के तुझे चाहा, बिना किसी हक़ के तेरा साथ निभाया। पर तूने मेरी मोहब्बत को नज़रअंदाज़ किया, जैसे मेरा इश्क़ कोई अधूरी किताब हो। काश एक बार तू कुछ कह देता, चाहे इंकार ही सही, मगर आवाज़ तो देता। पर तेरी चुप्पी ने मेरे इश्क़ को सबसे गहरी सजा दी, तेरी खामोशी ने मेरे दिल को तन्हाई में डुबो दिया। अब मैं तुझसे कोई जवाब नहीं माँगती, तेरी बेख़बरी को ही मेरी मोहब्बत का मुकाम मान लिया। पर एक बात याद रखना— मैंने तुझे सच्चे दिल से चाहा था, और शायद हमेशा चाहूँगी l
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