Bas ek sadi ki baat hai
बस एक सदी की बात है, फिर सब फ़ना होगा यहाँ न हम रहेंगे, न तुम रहोगे, न कोई निशान होगा यहाँ। ये शोर-ए-हस्ती, ये रंगो-बू, सब धुआँ-धुआँ हो जाएगा, बस एक सदी की बात है, फिर सब फ़ना होगा यहाँ। ये आशियाँ जिसे कभी सजाया था बड़े नाज़ से, कल इन दर-ओ-दीवारों पर पराये साये होंगे यहाँ। आज जो तेरा है, वही किसी और का होगा मकान, और ये कारवाँ यादों का भी आख़िर कहाँ होगा यहाँ। बस एक सदी की बात है, फिर सब फ़ना होगा यहाँ।
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