Barsat
यूं तो रास आता नहीं तेरा अदब । लफ़्ज़ों में सिमट जाए , वैसी बात नहीं है अब ।। होगी तू किसी के लिए इश्क का मंज़र । पर मेरी आंखों को तो रहने ही दे बंजर ।। ऐ बारिश, तेरे हर क़तरे में छिपी है वो यादें, जो मेरे बचपन के लम्हों की माला पिरोती हैं । तू आया ही ना कर मेरे आंगन में, क्यूंकि मेरी यादें मुझे ख़ूब अज़ाब देती हैं ।।
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