चाहत &फर्ज
kahu. फर्ज, मेरे पापाजी और मेरा परिवार, है जिन्होंने इतना अच्छा जीवन दिया। जिनकी अपेक्षाएं, हैं। की में कुछ तो कर सकूं खुद के लिए ही सही। में उन अपेक्षाएंओ को पूरा तो करना चाहती हूं । *लेकिन जीवन खा जाए तो इतना आसान नहीं है एक तरफ मेरी अन कही चाहते हैं।,जिन्हें न में प सकती न किसी को बता सकती। जो कि पाना असंभव है। *एक यही चाहत जीने से कभी,,,,, जीने को छीनने की तरफ ले जाती हैं।। और फर्ज, दर्द में भी रह कर खुश रहने की सलाह देता है। अपने लिए न सही परिवार के लिए।
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