Against Spiritualality
रंगीन दुनिया को बेरंग बनाया जा रहा हैं, मुझे कुछ ऐसा ज्ञान सिखाया जा रहा है, अपनो से थोडा दूर किया जा रहा है, दूसरी दुनिया में खुश रहने का हुनर सिखाया जा रहा है, भावनाओ के संगम युक्त दरिया को अब, एक स्थिर तालाब बनाया जा रहा हैं, अब तो तेरी भी कीमत घटाई जा रही, मुझे कुछ फुरकत जो सिखायी जा रही।, ( फुरकत: अकेलापन) खुदा की बनाई चंचलमय दुनिया में, मुझे एक विशाल पाषाण बनाया जा रहा। जीवन के हर रस को फीका बताकर, मुझे आत्मा की खोज में भटकाया जा रहा। (पाषाण: पत्थर) अंत में क्या होगा,मुझे उससे क्या फर्क पड़ता है, पर सफर जो होगा सारी भावनाओ के साथ जिया होगा। हाँ। कुछ नैतिक नियम तो साथ में होंगे, लेकिन दूसरी दुनिया के लिए सामान नहीं बटोरने होंगे। चलो अब आध्यात्मिक बाते बंद करते है, जीवन को उसके असली रूप में जीते है, थोड़ा अंजान, कभी खुशी,कभी दुख,कभी क्रोध कभी मोह,कभी डर,कभी चिंता,तो कभी थोड़ी ईर्ष्या। इन सारी भावनाओ को नैतिकता से बांधकर, जीवन को उसके असली रूप में जीते है। (उत्कर्ष केशरवानी)
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
