89 कहाँ से आते हैं ऐसे लोग
कहाँ से आते हैं ऐसे लोग अपने बारे में कितनी अच्छी बाते व्यक्त कर जाते हैं यानी ये पूरे दूध के धुले बेदाग देवदूत की तरह। अपने तमाम गुण जो आजतक इनके बारे में कोई जाना भी नहीं कोई सुना भी नहीं उसे भी बेहतरीन ढंग से परोस देते हैं। और इतना ही नहीं अपने राजवाड़े होने का भी अहसास करा जाते हैं। पर जो भी बातें कहते हैं सिर्फ और सिर्फ आत्मश्लाघा, अतिरंजना के अलावा कुछ नहीं। चलिए यहाँ तक तो ठीक पर दूसरों को तो कहीं का छोड़ते ही नहीं, दूसरों के बारे में तो मत पूछें क्या से क्या कह जाते हैं दूसरों को निकृष्ट बता जाते हैं ऐसा बखान कर देते हैं मानो ये कैमरा लेकर उसके कारनामों की हू-ब-हू रंगीन तस्वीर लिये हो। जो दूसरों को अपवित्र और नंगा अपने को समझते हैं पवित्र गंगा। पता नहीं कहाँ से आ जाते हैं ऐसे लोग।। नरेंद्र सिंह 28.08.2022
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