देव घनाक्षरी छन्द,(8,8,8,9)
आँगन में राम खेलें, ठुमक ठुमक चलें, खुश हो दशरथ जी ,विहँसते हैं मन मन। राजन बुलाते जब, भाग जाते प्रभु तब, धुन कर्णप्रिय लगे,बाजे पायल छन छन। पकड़ने जाते राजा ,कहते वे आ जा आ जा , पर हाथ आते नहीं, दौड़ लगाते हन हन। लीला करें खूब राम, चर्चा अवध में आम, बाल लीला देखने को,मचलते हैं जन जन।। नरेंद्र सिंह 30.05.2024
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