53.एक बनो,नेक बनो
यदि जोड़ने की कूबत नहीं है समाज को, तो समाज में शोले नहीं भड़काया करो। बुझा सको तो बुझाओ,वैमनस्य की आग, बुझ चुके मुद्दों में सलाई न जलाया करो। मत बनो समाज के जहरीले काला नाग, हर वक्त यूँ ही विषवमन मत किया करो। बनना है तो बन प्रेम व शांति के दूत तुम , "जिओ और जीने दो"का संदेश दिया करो। निर्माण करो समर्थ,स्वस्थ,सर्वसमाज का , अतीत झांककर, बैर-बीज मत बोया करो। देश आजाद अब,सब बराबर हो चुके हैं, वर्षो की बातों को लेकर मत रोया करो।। नरेंन्द्र सिंह 25.01.2024
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