43.शीर्षक:1528 का काला दिन
जरा सोचिए! कैसा दृश्य तब भयानक था; जब नीच मलेच्छों का आतंक अचानक था। निर्दोषों पर आकर अकस्मात वार किया निहत्थे हिंदुओं पर भयानक प्रहार किया। जब दुर्जन मीर बाकी मद में चूर होकर; पापी चढ़ गया था मन्दिर पर,क्रूर होकर। मलेच्छों ने अवध में तबाही मचाई थी; तब निहत्थे हिंदुओं पर आफत आई थी। गाजर-मूली समझ हिंदुओं को काटा था; वृक्ष-टहनी की तरह लोगों को छाँटा था। अल्ला हो अकबर के नारे पुकार पुकार; निर्दोषों को मौत के घाट उतार उतार। हिंदुओं के शवों पर,वो जश्न मनाया था; निहत्थे को मार, नीच वीर कहलाया था। मच गया था, घनघोर हाहाकार नगर में; गूँज उठी थी तब,चीखपुकार हर डगर में। राममन्दिर को मलेच्छों ने तब ध्वस्त किया ; सनातनियों का मनोबल को वे पस्त किया । मंदिर के नामोनिशान का अवसान किया; राममन्दिर को बाबरी मस्जिद नाम दिया। उस दिन भारत माता जार-जार रोई थी; जब भारती माँ अपनी अस्मिता खोई थी। नरेंद्र सिंह 22.01.2024
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