शीर्षक:धान के फसल-देहतिया 3
धनमा बऊड़यलई ,हरियर लगई बधिया हो, घसिया से अरीया ,छिप गेलई रे देहतिया। जउने अरीये अदमी चलई,ओही उजर लगे, बाकिये धरती हरियर, भेलई रे देहतिया।। मुड़ेठा बांध किसनमा,रख खंती कंधवा पर , मुछवा पर ताव दे , गुनगुनावै रे देहतिया। खेत खेत घुमी घुमी, अरीया के छेद भरई, पनिया से खेतवा ,डब डबावै रे देहतिया।। आसीन महीनमा में,इ हथिया नछतर बरसै, इ धनमा के अमरीत पान, करावै रे देहतिया। इन साल खेतिया के,बड़ बनल हय सुतरवा हो, मन मन किसनमा,पलान बनावै रे देहतिया। नरेंद्र सिंह,अतरी,गया 27.09.2024 (हथिया नक्षत्र का प्रथम दिन)
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