मगही बोलम (23 मात्रा )
मग़ही में हम्म बोलम,त बोलम,त बोलम , मगही में मुंह खोलम,त खोलम,त खोलम । एकर गुन हम्म गाइम,त गाइम,त गाइम, अप्पन भासा बोले में काहे लजाइम? बड़ निम्मन मीठ लगे,ई भासा हम्मार, एकरे हम्म लिखम अउ बोलम बार-बार। देलक हल ई हम्मरा निम्मन संसकार, कइसे हम्म करी अखनी बतिया इनकार। पर आझ हो गेल मगही के,बड़ गत हाल, एकर दुरगति देखs ही त,छूटइ मलाल। मगहिये तो मगही के, करइ बंटाधार, तनीसुन पढ़लिख गेलो त करइ तिरसकार। हम्मर मगह के,धरती हल,बड़का महान, बनला भगवान गौतम,पा के इहें ज्ञान। चीन, जापान, वर्मा, भूटान अउ लंका, हिनखर बज रहल हे,आझो सगरो डंका। मगह में पइदा,होल हल बहुते समराट , देसमा में हल,मगह के ऊंचगर ललाट। मागधी अउर मगध पर,सभे करs गुमान, मगही लिखs,बोलs,एकर करs उथान । नरेन्द्र सिंह 25.12.2024
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
