हे शिव (मापनी 222 122,1222)
हे आनंद दाता, तुम्हीं त्राता। तू माता पिता हो, तुम्हीं भ्राता।। हे प्रभु सृष्टिकर्ता, तुम्हीं दाता। तेरा नाम यश गुण,जगत गाता।। परमात्मा दुलारे, तुम्हीं प्यारे। तू ही सर्वदाता, तुम्हीं न्यारे ।। हो जग के सहारा, मुझे तारो। संकट जो घिरा है, उसे टारो।। मेरे नाथ शंभू , चले आओ । दुख सब दूर कर दें,न तड़पाओ।। शिव मुझ पर दया कर,उबारें तो। आकर प्रभु मुझे अब, सुधारें तो।। नरेंद्र सिंह,20.03.2025
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