सर्व मंगल 21 211
जो भजे हर,श्रेष्ठ वह नर। आज या कल,भाग्य उज्ज्वल ।। कर्म तू कर, यूँ नहीं डर । सर्व मंगल, जीत दंगल ।। शुद्ध मन रह ,स्वस्थ तन रह । राम को भज,द्वेष को तज ।। आस यदि कर,ध्यान भी धर। हो न विचलित,जीत निश्चित।। त्याग कर छल,भक्ति पथ चल। भक्त बन कर,जी न डर कर।। कष्ट के पल,दे वही बल। मान लो यह,प्रभु शरण गह।। नरेंद्र सिंह 05.02.2025
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