नव वर्ष 2026
सोचता हूँ, क्या बदलेगा जीवन में? न जाने कितने ख़्वाब लिए मन में, कोई जा रहा है, कोई आने वाला है, उम्मीद तो हर कोई लगाने वाला है। समय के हर नए दोहराव पर शोर मचेगा, जो सन्नाटे में है, उसका शोर कौन सुनेगा? ईमान पे चलने वालों को कीमत कौन देगा? बिकने वाला तो शायद हर हाल में बिकेगा। सड़कों से पूछो ज़रा, क्या वो बदलेंगे? महलों से पूछो ज़रा, क्या वो ये देखेंगे? अपने इरादों को हमसे सदा छुपाएंगे, हमारे वोट लेकर हमारे घर गिराएंगे। ख़ैर, नए वर्ष पर हर्षोल्लास बहुत है, सच को कम, झूठ को आज बहुत है, संघर्ष जीवन का सदा चलता रहेगा, नव वर्ष तो ऐसे ही आता-जाता रहेगा।
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