2 nd JUNE 2025- Virat kholi
अगर मेहनत से ही सफलता मिल जाती सबको तो मेरे बिस्तर में कहीं तू भी आज मेरे संग सोती , अगर अकेले ही लड़ कर जितना, कहीं होता है संभव तो मेरे आंगन में आज तू भी कहीं यूं बिखरी होती । तुझे जीतने के खातिर इस जीवन के, 18 साल मैने लगाए है , न जाने कितनी बार तो , मंजिल के करीब पहुंच कर भी ठोकरें खाए है , फिर भी हार ना कभी मानकर, तेरी तरफ ही चलता रहता हु कभी तो तू मुझे स्वीकार करेगी, इसी आस में तेरी ओर में बढ़ता रहता हु एक बार फिर से आ रहा में तुझे दीवानों के महलों में ले जाने , तुझे इस दिल के इस जिद को अपने आंखों से दिखलाने तब शायद कहीं तू यह जान सके की यह किस्मत क्या चीज होती है - जो सिर्फ अगर न हो साथ आपके तो, रातों की मेहनत , एक शन में रौंद कर सकती है तो शायद अबकी इस दिल को , तेरा भी साथ मिल जाएगा तुझे जीतने वालों में शायद, मेरा भी नाम जुड़ जाएगा ।।।।
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