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कवि होना कतई गुनाह नहीं है , पर कुछ तो मूल उद्देश्य बतलाओ; जिसे पढ़कर कतिपय मिले शिक्षा, ऐसी छाप तो लेखन में दिखलाओ। नहीं तो,क्यों न पढ़ें सुर,तुलसी,बिहारी वर्मा,गुप्त,प्रसाद,दिनकर व निराला; रामचरित मानस के दोहे,चौपाई, छंद या हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला। नरेंद्र सिंह 24.12.2023
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