कवि सम्मेलन 1st
1....... सूरज की रौशनी से भी प्यारी है वो रात, दीपों से सजा हो मां का धाम , जैसे हों कोई बात। सभी ग़मों को छोड़कर, खुशी के रंगों में खो जाएं, यहीं दीपोत्सव का समय है, सब दिलों में प्यार हो जाएं 2....... उत्सव है, खुशियों का माहौल है, हर दिल में उल्लास, हर चेहरा मुस्कान है। खुशियाँ सिर्फ बाहर नहीं, दिलों में भी छाई हैं, जब सच्चे भाव से हम एक दूसरे के साथ हैं। तभी तो आज दीप उत्सव का त्यौहार है ।। 3....... मुझे तो अँधेरों में जलना भी आता है राह कितनी भी मुश्किल हो पर चलना भी आता है।। कितने भी पत्थर बिछा दो तुम राहों में कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मुझे गिरकर संभलना भी आता है।। हम नहीं मानते कि ये सब किस्मत में लिखा था इरादे के पक्के हैं हमें किस्मत बदलना भी आता है।। तुम्हें क्या लगता है हम यूँ ही रेंगते रहेंगे जमीन पर थोड़ी दम तो भरने दो हमें उछलना भी आता है।। तूने ये कैसे सोच लिया कि हम भी पत्थर दिल हैं तेरी तरह अरे तुम नज़रें तो झुकाओ हमें पिघलना भी आता है।। ........
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