हरिगीतिका छंद (16,12,)
शीर्षक:प्रभु आओ धरा पर प्रभु राम लो अवतार फिर से, पाप अब तो बढ़ चला। मत देर कर आ तू धरा पर, नाश कर जो है बला।। बस आस है विश्वास तुझ पर, सज्जनों के दुख हरो। हम भक्त सब अपमान सहते, आ यहाँ अब कुछ करो।। कलयुग बचा है शेष अब तो, राम कब तू आ रहा। आकर उबारो धर्म को अब, घोर संकट छा रहा।। ले जन्म तू अब तो बचाओ, दुष्ट के आघात से। आ धर्म का उद्धार कर दो, इस बुरे हालात से।। नरेंद्र कुमार सिंह रामनवमी, 06.04.2025
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