छन्न पकैया छन्द(16,12 मात्राएं
छन्न पकैया छन्न पकैया, कलयुग है अब भारी, यहां वहाँ हर घर में देखो, होती मारामारी। अनुशासन खत्म हो गया है, सभी करे मनमानी, सभी कुएं में भाँग पड़ी है, सब घर एक कहानी।। छन्न पकैया छन्न पकैया, आपस में है खाई, है नहीं परिवार में एका, हर घर छिड़ी लड़ाई। हो गए सभी स्वार्थी लोभी, स्वाहा रिश्तेदारी, लड़ कट मरता भाई-भाई, न बरते होशियारी।। छन्न पकैया छन्न पकैया, पाखण्ड जड़ जमाया, लोग-बाग उत्तम पथ छोड़ा, अधर्म पथ अपनाया। कलयुग की है बुरी कहानी, सबकुछ गड़बड़ झाला, मदिरा सेवन करे पुजारी, ढोंगी जपता माला।। नरेंद्र सिंह, अतरी, गया
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