सरसी छंद, (16,11)
शीर्षक-- पाया आशीर्वाद करके मातु-पिता की सेवा, पाया आशीर्वाद। उनके शुभाशीष के चलते, तू है जो आबाद।। मंदिर-मंदिर जितना घूमो, समझो सब बेकार। मातु-पिता की अगर न सेवा, जीना है धिक्कार।। यही जगत में सबसे बढ़कर, जिनकी हो औलाद। उनके शुभाशीष के चलते, तू है जो आबाद।। तीन लोक में यहाँ न कोई, पालक का ले स्थान। पूजो इनको रे तू प्राणी, भटको नहीं जहान।। अमन-चैन यदि जीवन चाहो, मिले उन्हें आह्लाद। उनके शुभाशीष के चलते, तू है जो आबाद।। नरेन्द्र सिंह, अतरी,गया 25.06.2025
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