मापनी- 122-222-22, 1212-1212
शीर्षक--नमामि मातु शारदे कृपा बरसाओ हे देवी, सहाय हो उबार दे। बनूँ मैं ज्ञानी कर ऐसा, मुझे जरा निखार दे।। करूँ विनती मैं अज्ञानी, हरो कुबुद्धि तार दे। दया बरसे अनुरागी पर, नमामि मातु शारदे।। सिवा तेरे एक न जग में , तुम्हीं तनाव हारिणी। रचूँ कुछ हटकर रचना मैं, करो उपाय तारिणी।। बने अति प्रिय मेरा लेखन, लगे बहुत लुभावना। कृपा करना इतनी माता, विफल रहे न साधना।। रहूँ नत तेरे चरणों में, नमामि मातु शारदे। हरो सब बाधा लेखन की, उसे तुरंत टार दे।। नमन है वाग्देवी आद्या, मिले मुझे प्रसन्नता। शरण में रख ले माँ अपनी,जगत खिले महानता।। नरेंद्र सिंह, 14.05.2025
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
