मापनी- 122-222-22, 1212-1212
शीर्षक-- नयन पलक बुहारती* गए जबसे गोकुल तजकर, पयस्विनी चिघाड़ती। बसे मथुरा भूले संगी, सहेलियाँ दहाड़ती।। यशोदा माता रह चिंतित, नगर डगर निहारती। सभी व्रजबासी रह गम में, नयन पलक बुहारती।। कहे कपटी मुरलीधर को, मिले बहुत उलाहना। यशोदा का ऋण भी भूला, अपार स्नेह पालना।। यहाँ माता सुध-बुध खोकर, उसे सदा पुकारती। कन्हैया की स्मृति में हरदम , नयन पलक बुहारती।। नरेंद्र सिंह, 15.05.2025
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