मापनी- 122-222-22, 1212-1212
शीर्षक-- विचार शुद्धि कीजिए रखें पावन आत्मा अपनी, विचार शुद्धि कीजिए। हृदय निर्मल रखकर अपना, गुरूर त्याग दीजिए।। रहें हिलमिल आपस में सब, तमो स्वभाव त्यागिए। करें पालन वैदिक विधि को,विधान से न भागिए।। रहे मन अति पावन निश्छल, रखें सदैव शुद्धता। जिएँ उत्तम जीवन अपना, विचार में प्रबुद्धता।। क्षणिक है धरती पर सबकुछ, गुमान त्याग दीजिए। यहाँ से जाना है खाली, प्रतीति आप कीजिए।। बने जो त्यागी दानी नर, उसे मिले महानता। रहे जनकल्याणी बन जो, जिसे जहान जानता।। चले जो सच्चाई के पथ, डगर कठिन लगे भले। रहे अंदर से खुश वे नर, अगर सही ययी चले ।। नरेंद्र सिंह 17.05.2025 ययी -मार्ग
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
