मापनी :122-222-22, 1212-1212
शीर्षक-- नहीं नहीं कभी नहीं मिला सबकुछ जीवन में जो, त्रिदिव मुझे दिए यहीं। नहीं विस्मृत हो सकते प्रभु, नहीं नहीं कभी नहीं।। रहें जबतक साँसे मेरी, भजन नमन किया करूँ। धरा पर आऊँ जब जब ही, अखंड ध्यान मैं धरूँ।। नहीं कोई ईश्वर जैसा, सहायता मुझे करे । बिना माँगे देते सबकुछ, सदैव ये रहे खरे।। इन्हें कैसे विस्मृत कर दूँ, सदा भला मुझे किए। यही करते पालन-पोषण, प्रसिद्धि भी यही दिए।। बने रह आभारी मानव, यही सदैव पालते। सदा रहते रक्षक बन जो, सभी अनिष्ट टालते।। नहीं कोई इनके जैसा, नहीं नहीं कभी नहीं। रखो दिल में इनकी मूरत, तलाश मत करो कहीं ।। नरेंद्र सिंह,16.05.2025
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
