122-222-22, 12-12-12(15,12)
निभा रहे परंपरा उमापति हे शिव अवतारी, नमन तुझे सदा करूँ। हरो हे प्रभु कल्मष मेरा, करो दया अभी तरूँ।। नहीं कोई जग में अपना, बचा सके मुझे यहाँ । तुम्हीं हो जो अघ हर सकता,भला किसे कहूँ कहाँ।। तुम्हीं शिव हो औढर दानी, निभा रहे परम्परा। कृपा बरसे मुझ पर शंकर, मिले मुझे ऋतम्भरा।। नहीं कोई तेरे जैसा, मिटा सके लिखा बदा। करो कुछ हटकर हर शम्भू, मिले यहाँ खुशी सदा।। रमापति हे हर-हर बम-बम, कृपा करो शिवा नमो। भला करना माफी देकर, हरो अगुण रजो तमो।। उबारो मुझको पापों से, बना मुझे सदा सुधा । हरो तृष्णा भोले बाबा, मिटे अहं सभी क्षुधा।। 12.05.2025
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