गल्तियाँ 1.0 (Hindi version)
पुरानी गल्तियों का समाधान ढूंढ रहे हो ना, उन्हें सहि कैसे करना हैं यही सोच रहे हो ना l उस दर्द को छिपाने के लिए ही सही लेकिन अपने अतीत को भुलाने की कोशिश कर तो रहे हो l जब तुम्हें अपने अधूरे सपने फिर याद आ रहे थे, तब क्या तुम अपने आप से ही दूर भाग रहे थे l अरे, अपने ही ऊपर लिखी उस किताब के पन्ने क्या तुम बिन पढ़े ही पलट रहे थे? कभी गर्व किया है उसका, जिस शरीर में तुम रहते हो l अरे, तुम्हें क्या क्या है मिला ज़रा गिन कर तो देखो, कि तुम्हारे पास जो कुछ है उसका शुक्र तो करो, बस दूसरों को देख युही मन ही मन जला न करो l कहीं पर थोडा ठहरो और ख़ुदको भी पहचानो, अपने लिए कुछ पल काम से चुराकर घर लाया करो l अरे, ये दुनिया ख़ुद अपनी बात कहकर भूल जाती हैं, तुम भी कभी अपनी "कुछ" गल्तियों को भुलाया करो l बिना गलती के सीख अधूरी है, सँभलने के लिए पहले गिरना भी ज़रूरी है l और जितने दौर आते हैं ज़िंदगी में, हर दौर के लिए एक ठोकर ज़रूरी है l देखो, तो बहुत बुरी हैं गल्तियां, सीखों क्योंकी गुरु समान होती हैं गल्तियां l महसूस करो तो तुम्हें जीना सीखाती हैं गल्तियां, अरे, समझो कि तुम्हें इंसान भी बनाती है गलतियां l ~ CHIHIRO <3 Inspired by: Amandeep Singh Khayal 🤌🏻
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
