लव जिहाद पार्ट 1
न मजहब तुम्हारा सुंदर है, न संस्कार भरोसे वाले हैं.. जो तुमसे दिल मिला बैठे, वे सभी सब ही गंदे नाले हैं, पहचान बदल नफरत को अपनी, यू अंजाम देते हो बन कर साप विषैले तुम तो,समाज को डसते रहते हो ना जाने कितनी साक्षी,कितनी श्रद्धा अभी बाकी हैं हे कट्टरता के प्रेमी,ये कहा सीख के आते हो..? कुछ मेरी सभ्यता में भी बैठे हुए नीच नपुंसक हैं, इसीलिए मजहब में तुम्हारे,सब के सब बड़े हिंसक हैं क्यों जिहाद तुम करते हो, शिक्षा लो कभी तो मुहब्बत का अरे पशु तुल्य नीच नकृष्टों,तुमसे अच्छे तो जानवर हैं आज यही जो करते हो तुम,कल तुम पर भी आएगा, कर्मा है ,ये लौट के एक दिन पास तुम्हारे जाएगा कभी नही सोचा तुमने की बन जाऊं कलाम के जैसा छोड़ दू सब कट्टरता को,बन जाऊ हामिद के जैसा तुम तो अपने मौलानाओं के चंगुल में फसते गए, उनकी दाल गलाते हुए ही,खुद का जीवन डसते गए कितनी बुरी मौत मारी,जाने कितनी इन बच्चियों को नही कलेजा फटा तुम्हारा,पत्थर से कूटते बच्चियों को टुकड़े टुकड़े कर डाले,तुमने न जाने कितनियों को या अल्लाह तू ही बता क्यों नफरत इतनी तेरे बंदों को अब तो डर सा लगने लगा है,इस कौम वालो से मिलने में रखने में उनसे प्रेम परस्पर,दिल से दिल को जोड़ने में बड़ी भयानक हुई दशा है,देश में आज बेटियों की बचा लो अपनी बहन बेटियां,अब्दुल के इस चंगुल से To be continued........
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