मैं डायरी नहीं लिखता02/01/2026
मैं डायरी नहीं लिखता, शायद नही लिखता क्योंकि अपनी कहानी बताने से डरता हूं, घबराता हूं किसी को मेरे बारे में बताने से लोग क्या सोचेंगे,मेरे बारे में जानने से इसलिए नहीं लिखता। शायद इसलिए भी नहीं लिखता क्योंकि आलस की चादर ओढ लेता हूं जब लिखने का सोचता हूं, पर फिर सोचता हूं कि रुकता नहीं जब लिखने बैठता हूं मैं लिखता हूं पर केवल डायरी नहीं लिखता। मेरी दिनचर्या जानने से किसीको क्या मिलेगा मेरे बारे में जानना कौन चाहेगा, मेरी सोच से सोच मिला पाएगा कोई जब पढ़ेगा मेरे बारे में शायद इसलिए नहीं लिखता। सोचा लिखूं जैसे लोग लिखते हैं, सोचा सुनाऊं कहानियां जैसे लोग सुनाते हैं, फिर सोचा कि मेरी कहानी कौन सुनेगा तो नहीं लिखता। कई बार उठाता हूं हाथ पन्ने पलटता हूं पर जैसे ही लिखने को हाथ आगे बढ़ाता हूं तो सोचता हूं नहीं लिखता। मैं लिख लेता हूं तमाम हर उस चीज पे जिससे मैं जुड़ पाता हूं शायद मैं डायरी से नहीं जुड़ पाता इसलिए डायरी नहीं लिखता।।
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