मौसम ए इश्क
दिल मचल गया उसके आहट से जिसका इंतज़ार था हमे बरसों से। चल रही थी गाड़ी सीधी पटरी पर ना कोई हलचल और ना ही शिकवे; उसने आके ऐसी आग लगाई जीने की, मुस्कुराने लगी मैं हर साधारण से लम्हे पर इतनी खूबसूरती है अब मेरे हर पल में।
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