हादसा
ये क्या हो गया हादसा मेरे साथ, मुझे जुदा कर दिया चलने को किसी और के साथ। रातें काँटों सी चुभती हैं, दिन बीतता है गैरों के साथ। लोग कहते हैं मुझसे, “तू भी चल दे किसी और के साथ।” कैसे समझाऊँ इस रूह को अपनी, जो जुड़ी है सिर्फ तेरे साथ। घर भी वीराना सा लगता है, जबसे टूटा है तेरा साथ। ख्वाबों ने भी तोड़ दिया नाता इन आँखों के साथ। जबसे तूने तोड़ दिए वो सपने जो सजाए थे तेरे साथ। ये क्या हो गया हादसा मेरे साथ, मुझे जुदा कर दिया चलने को किसी और के साथ।
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