मुहब्बत को अधूरा छोड़ के
मुहब्बत को अधूरा छोड़ के तरस रहे हो, मेरे बाद आखिर किसके लिए सज रहे हो। जो कहते थे बिना मेरे इक पल भी नहीं जीना, आज उसी बात पर चुपचाप हँस रहे हो। तोड़ कर दिल मेरा अब सोचते फिरते हो, आगे क्या होगा यही सोच के डर रहे हो। जिसे छोड़ कर गए थे बड़ी शान से तुम, आज उसी की कमी में अंदर से बिखर रहे हो। तुम्हारी बेरुख़ी का असर देख लेना इक दिन, जिस आग में छोड़ा था उसी में जल रहे हो। मैंने भी तेरे जाने का मातम नहीं किया, आँसू छुपा के खुद को कमज़ोर नहीं किया। रातों की नींद बेच के सपने खरीद लाया, टूटा था जिस जगह से वहीं से उठाया। अब मेरे नाम से लोग पहचान रखते हैं, मेरी मेहनतों का शहर में मान रखते हैं। जो कल तक मेरी औक़ात गिना करते थे, आज वही सामने आकर सलाम करते हैं। तेरी याद को भी मैंने धुएँ में उड़ा दिया, दिल के हर इक दर्द को हँस कर भुला दिया। अब मेरी कामयाबी की चर्चा है हर तरफ़, और तू भीड़ में खड़ी बस मुझे देख रही है। तेरे चेहरे की ख़ामोशी बता देती है सब, तू आज भी मेरे लौट आने की आस में है अब। जिसे छोड़ कर गई थी तू खिलौना समझ कर, आज वही मुकद्दर बदल रहा है खुल कर। अब तुझे एहसास हुआ क्या खो दिया तूने, एक सच्चा चाहने वाला खुद से जुदा किया तूने। मगर अब लौट के आने से क्या हासिल होगा, जो टूट गया भरोसा वो ना फिर हासिल होगा। मैं अब भी मुस्कुराता हूँ मगर पहले सा नहीं, तेरे बाद किसी पर दिल ये ठहरा सा नहीं।
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