कौन क्या है
कौन क्या है ये मैंने भी देखा सनम, हर किसी का बदलता है चेहरा सनम। जिनको समझा था अपना सहारा कभी, वो ही करने लगे दिल पे हमला सनम। दर्द जब हद से बढ़ने लगा रात भर, तब खुला कौन अपना था कितना सनम। वक्त ने सबकी औक़ात दिखला दी यूँ, कोई अपना न निकला ये समझा सनम। पीठ पीछे वही वार करते रहे, सामने बोलते थे वो अच्छा सनम। अब भरोसा किसी पर भी होता नहीं, ज़ख्म इतना मिला प्यार करके सनम। 'भूपेंद्र' अब अकेला ही चलता है वो, जिसने दुनिया को नज़दीक देखा सनम।
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