दोस्ती
दोस्ती हमसे हमें मिलाती है, मुस्कुराकर जीना सिखाती है। छोटी-सी चादर में आसमान दिखाती है, तूफ़ानों से लड़कर सँवरना सिखाती है। फ़क़ीरी में भी महफ़िल सजाती है, महफ़िलों से सच्चे यार चुराती है। तपरी की चाय को ताज बनाती है, ठेले में भी पूरी हयात दिखाती है। ज़हनी बातों को भी अल्फ़ाज़ सिखाती है, टूटे कांच पर चलने का हौसला दिलाती है। हुजूम के हजार अजनबी चहरों के दरमियां, इक दोस्ती ही सुकून का महल बनवाती है। दर्द की गर्द जब परेशां मन पर बैठ जाती है, यही हमें सम्भालकर फिर हंसना सिखाती हैं। ना दौलत, ना शोहरत, ना नाम की ही आरज़ू, दोस्ती मुश्किलों में साथ निभाने की कला सिखाती है। कुछ रिश्ते जन्म से नहीं, तकदीर से बनते हैं, तभी तो दोस्त तकलीफ़ में साथ खड़े मिलते हैं। दुनिया चाहे गिरगिट सा रंग बदलती रहे, सच्चे दोस्त हमेशा ही दिल के मकान में रहते हैं।
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