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मुश्किलों से डरना क्या, रास्तों में रुकना क्या, जो ठान लिया दिल ने, फिर पीछे मुड़ना क्या। गिरकर जो संभल जाता है, वही इंसान कहलाता है, अंधेरों से लड़कर ही, सूरज नया निकल आता है। मेहनत को अपना साथी बना, सपनों को अपनी राह बना, आज भले ही वक्त कठिन हो, कल को अपनी जीत बना। हार कभी अंतिम नहीं होती, कोशिश कभी व्यर्थ नहीं होती, जो खुद पर विश्वास रखे, उसकी मंज़िल दूर नहीं होती। चलते रहो मुसाफिर बनकर, हर दर्द को ताकत कर, एक दिन दुनिया भी बोलेगी — “ये इंसान सच में था बेहतर।”
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