वक़्त लगेगा।
तू दूर था, फिर क़रीब आया, अब तुझसे फ़ासला करने में वक़्त लगेगा। कोई आरज़ू न थी दिल में, तूने ही उसे चाहत बनाया, अब ख़ुद को लौटाने में वक़्त लगेगा। रग-रग पढ़ा तूने मुझको, मैंने भी सफ़्हे पलट डाले, अब ये किताब बंद करने में वक़्त लगेगा। गहरे राज़ बंद पेटी के खोले थे तुझसे, तूने भी कुछ बातें सरसरी-सी बतलाई, अब वो बक्सा बंद करने में वक़्त लगेगा। रोज़ का सिलसिला था तेरा-मेरा, आदत-सी हो गई थी तेरी, अब उस आदत को छोड़ने में वक़्त लगेगा। जज़्बातों को उकेरा तूने, मैं भी बहती चली गई, अब उनकी क़ब्र बनाने में वक़्त लगेगा। क़ुर्बतें बढ़ाईं तूने, मैंने भी बढ़ने दी, अब उन्हें मिटाने में वक़्त लगेगा। अफ़सोस,, न था, न है, न होगा, मगर उसे ‘अफ़सोस’ कहने में वक़्त लगेगा। समझ बैठे थे बाहम फ़रिश्ता शायद, हम भी,, और तुम भी, अब उसे वहम बताने में वक़्त लगेगा। तू भी मुस्कुराएगा, मैं भी खिलखिलाऊँगी, मगर तुझे भुला देने में वक़्त लगेगा।
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