देश बदलेगा
मासूम खिलखिलाते बच्चों की मुस्कुराहट हो, नन्हीं उँगलियों में आसमाँ छू लेने की ताकत हो। ख़्वाब देखें वो चाँद-सितारों से भी आगे जाने के, मगर ज़मीं पर उनके पाँव हमेशा सलामत हों। ऐसा हो जब ख़ुशनुमा परिवेश अपना, तब बदलेगा देश भी विकासशील रूप अपना। ये राह मगर इतनी भी आसान नहीं, हर किसी को यहाँ बदलना होगा अंदाज़ अपना। नफ़रत से नहीं, संस्कारों से ही घर सँवरेंगे, मेहनत और ईमान से ही सबके सपने निखरेंगे। जब हर इक दिल में ऐसा सुनहरा ख़्वाब जगेगा, तभी सही मायने में नया बदलाव आएगा।
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