दहेज
आज फिर से थम गई एक सांसे सिर्फ एक दहेज के लिए, क्या दहेज इतना प्यारा है किसी के जान से प्यारी बेटी से भी, इंसान इतना लोभी कैसे हो सकता है कि किसी की बेटी को जीने का अधिकार भी नहीं देता, क्या पैसे, सोने, चांदी, गाड़िया इतनी प्यारी हो गई है कि इंसान की कोई कीमत नहीं है, माना कि आपने अपने बेटे को नाजों से पाला होगा पर किसी की बेटी को भी उसके मां-बाप ने राजकुमारी जैसे ही पाला होगा न, अपनी बेटी सबको प्यारी होती हैं फिर एक बहू को प्यार क्यूं नहीं मिलता, उसे ताने देकर,गालियां देकर, पीट कर परेशान किया जाता है और जब इससे भी मन नहीं भरता, तो सिर्फ एक दहेज के लिए उससे उसकी जिंदगी ही छिन ली जाती है, क्या बीतता होगा उस मां-बाप के ऊपर जिसके आंखों के सामने उसकी बेटी की लाश रखी होती है, और वो चाहे जितना भी रोले पर अब उनकी बेटी अब वापस नहीं आयेगी , एक पिता जब अपने बेटी की शादी करता है तो वो अपने दामाद में खुद को ढूंढता हैं कि मेरे बाद मेरी बेटी को मेरा दामाद राजकुमारी के जैसा रखेगा, पर कौन जानता है कि उसकी बेटी की सांसे ही छीन ली जायेगी सिर्फ एक दहेज के लिए........?
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