सलाम
नज़रों से नज़रों को सलाम भेजा है, ज़रा ग़ौर करिएगा — सरेआम भेजा है। छुपाते रहे हम इश्क़ अब तक जहाँ भर से, आज पहली दफ़ा ऐलानिया पैग़ाम भेजा है।
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