निशाने पर तीर
आँखें मूंद कर चल दिये ऐसी मंज़िल की ओर जिसके सपने बचपन में ही सज गए थे; प्यार से बोये हुए बीज आज खूबसूरत फल बनकर हर दिन को सुनहरा बना रहे; हर कदम पर आशा की किरण और नजदीक से नज़र आ रही और दिन यह यकीन बढ़ता जा रहा कि जीवन की गाड़ी अपनी पटरी पर आहिस्ता आहिस्ता ही सही पाउच ही जाएगी।
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