सूरज
अंगार बने सूरज को अब बर्फ़ ओढ़ानी है। जलते-जलते जल जाएगा, इतनी सी बात उसे समझानी है। राख होकर ढह जाएगा, ख़ुद को इतना भी नहीं सताना है। मद्धम-मद्धम रौशन रहकर, सबको नई किरण दिखानी है। बारीकी जलने और मद्धम रहने के बीच की, अब सूरज को सिखानी है।
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