काश तुम पहले दिन जैसे होते...
वो पहला दिन, वो पहली मुलाकात, जब हर बात में थी एक अलग ही बात। वो चेहरे पर मुस्कान, वो आँखों का नूर, तब कहाँ पता था कि तुम हो जाओगे इतने दूर। तुम तब वक्त निकालकर बात करते थे, मेरी छोटी-छोटी बातों पर भी मरते थे। आज वक्त तो है, पर शायद वो चाहत नहीं, तुम्हारे पास होने पर भी मिलती वो राहत नहीं। "बदल गए हो तुम वक्त की लकीरों की तरह, अब देखते हो मुझे किसी अजनबी की तरह। काश थाम लेते तुम वो बीता हुआ समां, तो आज यूँ बिखरा न होता मेरा ये जहां।" ख्वाहिश बस इतनी है कि वो दौर लौट आए, जो रूठ गया है हमसे, वो इंसान मान जाए। थक गई हूँ मैं इस बदलते हुए अंदाज़ से, काश तुम आज भी वैसे ही होते, जैसे थे पहले दिन से...
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