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aapko yad hai papa कैसे जब मार्को निखिल को ठंड लगती थी तो अपनी जैकेट के अंदर हमे छिपा लिए करते थे, बस फर्क इतना है कि तब हम छोटा हुआ करते थे आज बड़े हो गए, अपनी छांव में हमे बड़ा किया, बुरे रास्ते पे जाने से हमेशा बचाया, अंगुली पकड़ कर नहीं चलाया तो क्या हुआ, गिरने से हमेशा बचाया, हमारे हर सपने को अपना समझा, सब कुछ सह कुछ कर कर दिखाने की , हिम्मत, हौसला हमेशा बढ़ाया, आंखों में आशु लिए खुद से जब अलग किया , तो खुद भी खूब रोया बापू मेरा , पर हमको कमजोर न पड़ने दिया।। ऐसा कलेजा एक बाप का ही हो सकता है
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