😄😄 कुछ भी 😄😄
सुनो ना! तुम ना, थोड़ा कम,, हाँ, थोड़ा कम, सही सुना तुमने- थोड़ा कम बात करो हमसे। सब आँख लगाए बैठे हैं, बस ये देखने को कि कब, कहाँ, कैसे, क्यों, और कितनी बात की हमने। इसलिए ही थोड़ा कम करो बात हमसे, थोड़ा कम करो प्यार हमसे, थोड़ा कम करो इज़हार हमसे। और हो सके तो थोड़ा कम करो तकरार हमसे,, क्योंकि ये दुनिया सवाल बहुत करती है, और हम जवाबों में उलझ जाते हैं, जो रिश्ता बस एहसास से चलता है, उसे लोग अल्फ़ाज़ों में तोल जाते हैं। तो चलो, थोड़ा सा छुपा लें इसे, नज़रों से, बातों से, हालातों से, ताकि जो अपना है सिर्फ़ अपना रहे, बचा रहे हर शक, हर इल्ज़ाम से। पर एक बात याद रखना- कम होगा दुनिया के लिए, पर दिल में जो है, वो कभी कम नहीं होगा हमसे,,
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