तुम ख़ास हो, एक हसीं एहसास हो।
तुम ख़ास हो, एक हसीं एहसास हो। मतलब की दुनिया में, सुकून की तलाश हो। तपती दोपहरी में, ठंडक की प्यास हो। ढलती शाम में, महताब की आस हो। सैलाब से जूझती कश्ती की, साहिल की उजास हो। थके हुए मुसाफ़िर की, मंज़िल का आकाश हो। ग़ैर-मौसीक़ी ग़ज़ल की, रक़्स-ओ-साज़ हो। मुरझाए रूखे गुलाबों की, मीठी सी सुवास हो। ईश्वर से की हर इबादत का, अडिग अटूट विश्वास हो। तुम ख़ास हो, एक हसीं एहसास हो।
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