इश्क़
बाज़ार में हर तरफ़ झूठ बिक रहा था, और हम उन्हीं से सच ख़रीद बैठे। यहाँ तक तो सफ़र ठीक रहा, इल्म तब हुआ जब हम उनसे इश्क़ ख़रीद बैठे।
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