जनाजा एक तरफ रख अपना
जनाजा एक तरफ रख अपना मुझे अपनी दुनिया सजानी है मैं जिंदा हूं लाश यहां पर तेरी याद में दुनिया दीवानी है तू मरके भी यूं अमर हो गया हर शय में तेरा राज़ छिपा है तू कमाल भी है क्या असल में कि हर तरफ तेरा मलाल छिपा है तू मरके इतना मशहूर हुआ है मुझे जीते जी ख्याती न मिली हर गली में शायर बना फिरता मैं पर कभी मुकम्मल थाती न मिली कभी न होंगे हम बराबर क्यूंकि बीच में कफ़न बड़ी धानी है जनाजा एक तरफ रख अपना मुझे अपनी दुनिया सजानी है
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