वो पहली बारिश,,
वो पहली बारिश, मन को छूती, तन को गुदगुदाती, शाखों से इठलाती। वो पहली बारिश, घर से पकौड़ों की आवाज़ लगाती, अदरक वाली चाय संग बुलाती, मिट्टी को छूकर इत्तर सी भीनी खुशबू फैलाती। वो पहली बारिश, बच्चों को गड्ढों में समंदर दिखाती, कागज़ की नावों पर ख़्वाहिशें घुमाती, खुशियों की तरंग सबके मन में दौड़ाती। वो पहली बारिश, खेतों में खड़ी फसलों का वरदान कहलाती, प्यासे पपीहे की तिश्नगी बुझाती, नदियों के चंचल पानी की खूबसूरती बढ़ाती। वो पहली बारिश, तुमको, मुझको, हम सबको मोर बनाती, पीहू-पीहू की धुन सुनाती, पशुओं को जलती धूप से बचाती। वो पहली बारिश, घर के भीतर नहीं, बाहर बुलाती, चिड़िया, फूल, पत्तों संग हमें भी थुमकाती, तितलियों को रंगों की चादर ओढ़ाती। वो पहली बारिश, बूंदों की धुन पर मौसम को गुनगुनाती, सूखी रूह को भी सुकून दे जाती, और हर दिल को थोड़ा बच्चा बनाती। वो पहली बारिश,,
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